संदेश

किताबें काफ़ी नही

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सिर्फ़ किताबें काफ़ी नही ज़िंदगी में आगे बढ़ने के लिए हथियार भी उठाना पड़ता है जंग ए ज़िंदगी लड़ने के लिए।। ~ज्योति थापा

डायरी

  कई सपने लिखे थे कि कभी तो पूरे होंगे आज फाड़ दिए मैंने डायरी के वो पन्ने।। ©®ज्योति

यूं ही

  समझा नही सकते तो  बहलाया न करो यूं ही मेरे ज़ख्मो को सहलाया न करो।। ©®ज्योति

ख़्वाहिशे

 क्योँकि हमारी ख़्वाहिशों का कोई अंत नही होता ख़्वाहिशों को जो छोड़ सके हर आदमी संत नही होता।। ©®ज्योति

मायका

  मायके का आंगन भी आज पराया सा लगता है मुझे तो यह मेरी ज़िन्दगी घर किराया का लगता है।। ©®ज्योति

चाह

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जिनके मन में होती है आगे बढ़ने की चाह  उनके लिए अपने आप खुल जाती है राह।। ©®ज्योति

बहुत सताता है

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जिससे उम्र भर का नाता है वही मुझे बहुत सताता है मग़र एक खूबी है उसमें मेरे दर्द को अपना बताता है।। -ज्योति